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हम मानते हैं — "दुनिया के सभी लोग बराबर हैं।" और इसी सोच को ज़मीन पर उतारने के लिए हमने एक प्रयास शुरू किया है। हम पूरी दुनिया नहीं बदल सकते, लेकिन अपने क्षेत्र में बदलाव ला सकते हैं।
हमने अपने जिले को कार्यक्षेत्र मानते हुए, यहां के 1 लाख परिवारों तक पहुंचने का लक्ष्य तय किया है। ये परिवार हमारे उपभोक्तास्थानीय दुकानों के माध्यम से मिलेंगे।
हम लाभ-गंगा ट्रेडिंग कंपनी और सेला मार्ट के सहयोग से इस मिशन का विस्तार करेंगे। इन्हीं सदस्यों की पूंजी से हम उत्पादन करेंगे, जिससे उन्हें लाभांश भी मिलेगा।
भविष्य में, हम विभिन्न क्षेत्रों में प्रोडक्शन यूनिट्स लगाएंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर ही रोजगार मिलेगा और व्यापार बढ़ेगा।
यदि यह मॉडल सफल रहा, तो यह देशव्यापी विकास का एक नया मॉडल बन सकता है, जिसे अन्य जिले भी अपनाएँगे। और तब... एक नई सामाजिक-आर्थिक क्रांति जन्म लेगी!
पूँजीवाद की चकाचौंध के बीच उपभोक्ता की हैसियत एक ठलुआ सी रह गई है। जीवनशैली खैरातों पर आधारित हो गई है। समाज में अकर्मण्यता की प्रवृत्ति बढ़ रही है। सहकार के माध्यम से उपभोक्ता को राजा बनाने के लिए काम कर रहे हैं।
"उपभोग से उत्पादन की ओर" का सिद्धान्त तैयार किया गया है। गाँव/मोहल्ले की दुकानों को टाई-अप कर उन्हें इस मिशन-क्रांति का केन्द्र बनाया जायेगा। हर मेंबर की हैसियत दुकानदार की होगी, और यही बाद में कारोबारी में बदल जायेगी।
आज पूंजीवाद का साम्राज्य है जबकि हमारे महापुरुष देश में समाजवादी अर्थ-व्यवस्था स्थापित करना चाहते थे। संविधान की प्रस्तावना में इसका उल्लेख है। यही हमारी प्रेरणा है।
हर हाथ को काम और हर घर को इंकम के सिस्टम से जोड़ना हमारा लक्ष्य है। यह सरल नहीं है, लेकिन अगर लोग हमारे मिशन को जानें और समझें तो यही कठिन कार्य भी सरल हो जाएगा।
हर व्यक्ति चाहता है कि उसे भरपूर पैसा मिले ताकि जीवन आनंदमय हो; लेकिन ऐसा नहीं है। ईश्वर द्वारा विना भेदभाव के सबको बराबरी से संसाधन प्रदत्त हैं। लेकिन मनुष्यकृत सिस्टम के कारण गरीबी-अमीरी है। इस सिस्टम के कारण लाभ की गंगा कुछ ही लोगों की तिजोरी की तरफ बहती है।
“मनुष्यकृत इस सिस्टम में बदलाव होना चाहिए। लाभ की गंगा मैं बाँध बने और उससे छोटी-छोटी नहरें निकलें; जिससे आम आदमी की जिंदगी भी सिंचित हो।"
हमारा लाभ-गंगा मिशन इसी दिशा में काम कर रहा है।